काकोरी नगर पंचायत के हौदा तालाब पर वर्ष 2008 में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट हुआ था। हादसे में भट्ठा टोला निवासी पुन्नी का भाई सुनील (14) की मौत हो गई थी और चार साल की मासूम बहन सुमन, माता-पिता और भाई हरिकेश व पुन्नी गंभीर रूप से झुलस गए थे। इस घटना को याद कर आज भी पुन्नी और उसका पूरा परिवार सिहर उठते हैं।
पुन्नी का कहना है कि उस दिन फैक्ट्री में उसका ही परिवार काम पर गया था। सहालग होने के कारण पटाखों का निर्माण हो रहा था। पटाखा जिस कोठरी में बनाए जा रहे थे वह पूरी तरह से बंद थी। यहां करीब 80 किलो को विस्फोटक ड्रम में रखा था। हादसा कैसे हुआ कुछ समझ नहीं आया और कोठरी में धुआं भर जाने से दरवाजा ढृ़ंढे ही नहीं मिला। पुन्नी का कहना है कि हादसे के बाद उसने और परिवार के अन्य लोगों ने इस खतरनाक काम से तौबा कर ली। सभी लोग अलग-अलग मजदूरी करते हैं। उधर मुआवजे को लेकर भी पुन्नी का कहना है कि उसे किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला।
नहीं बंद हुआ अवैध कारोबार
पुन्नी के साथ हुए हादसे के बाद भी अवैध कारोबारियों ने सबक नहीं लिया। कारोबारी उसी स्थान पर अभी तक जमा हुआ है। विस्फोट के बाद कुछ समय कोठरी में ताला लगा दिया गया, लेकिन पुलिस की जांच पड़ताल बंद होते ही अवैध फैक्ट्री फिर से आबाद हो गई।
यहां भी बनते हैं पटाखे
सरोजनीनगर क्षेत्र के कई गांवों में चोरी छिपे पटाखे बनाने का काम होता है। पुलिस और प्रशासन से नजर बचाकर बंथरा और काकोरी के सीमावर्ती कुछ गांवों में यह कारोबार खूब होता है। हालांकि इन गांवों में अधिकतर बने बनाए पटाखे मोहनलालगंज, मोहान क्षेत्र से आते हैं।
पुन्नी का कहना है कि उस दिन फैक्ट्री में उसका ही परिवार काम पर गया था। सहालग होने के कारण पटाखों का निर्माण हो रहा था। पटाखा जिस कोठरी में बनाए जा रहे थे वह पूरी तरह से बंद थी। यहां करीब 80 किलो को विस्फोटक ड्रम में रखा था। हादसा कैसे हुआ कुछ समझ नहीं आया और कोठरी में धुआं भर जाने से दरवाजा ढृ़ंढे ही नहीं मिला। पुन्नी का कहना है कि हादसे के बाद उसने और परिवार के अन्य लोगों ने इस खतरनाक काम से तौबा कर ली। सभी लोग अलग-अलग मजदूरी करते हैं। उधर मुआवजे को लेकर भी पुन्नी का कहना है कि उसे किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला।
नहीं बंद हुआ अवैध कारोबार
पुन्नी के साथ हुए हादसे के बाद भी अवैध कारोबारियों ने सबक नहीं लिया। कारोबारी उसी स्थान पर अभी तक जमा हुआ है। विस्फोट के बाद कुछ समय कोठरी में ताला लगा दिया गया, लेकिन पुलिस की जांच पड़ताल बंद होते ही अवैध फैक्ट्री फिर से आबाद हो गई।
यहां भी बनते हैं पटाखे
सरोजनीनगर क्षेत्र के कई गांवों में चोरी छिपे पटाखे बनाने का काम होता है। पुलिस और प्रशासन से नजर बचाकर बंथरा और काकोरी के सीमावर्ती कुछ गांवों में यह कारोबार खूब होता है। हालांकि इन गांवों में अधिकतर बने बनाए पटाखे मोहनलालगंज, मोहान क्षेत्र से आते हैं।
Source: News in Hindi and Newspaper
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