राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत अभियान में रविवार को मौसम और पत्थरबाज दोनों ने ही बाधा पहुंचाई। इससे घंटों राहत कार्य नहीं चल पाए। हालांकि कई क्षेत्रों में बारिश के बावजूद जलस्तर में कमी आई। वहीं, कश्मीर में बाढ़ से मरने वालों के सही आंकड़े की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। अलबत्ता सैकड़ों लोग अभी भी बाढ़ में लापता हैं।
रविवार को श्रीनगर तथा जम्मू में मौसम खराब होने के कारण करीब तीन घंटे तक वायु सेना, सेना व राहत कार्य में जुटी अन्य एजेंसियां अपना अभियान नहीं चला पाई। इससे कई क्षेत्रों में राहत नहीं पहुंचाई जा सकी। बाढ़ में फंसे लोगों का इससे सुरक्षित स्थानों पर आने का इंतजार लगातार बढ़ता गया। वहीं, जब मौसम में सुधार हुआ तो वायु सेना को फिर से राहत पहुंचाने में परेशानी हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र ंिसह ने कहा कि बारिश इतनी तेज होने की संभावना नहीं है जैसी पहले हुई है।
श्रीनगर के रैनावाड़ी क्षेत्र में चार बार हेलीकाप्टरों पर कुछ शरारती तत्वों ने पत्थर फेंके। इससे इस जगह पर राहत सामग्री भी नहीं उतारी जा सकी। लोगों में इस क्षेत्र में भारी रोष देखने को मिला। इसे देखते हुए जम्मू से आर्म्ड पुलिस की दो बटालियनों को श्रीनगर में भेजा गया है ताकि कानून व्यवस्था को बनाया जा सके।
वहीं, एयर वाइस मार्शल उपकरजीत सिंह ने कहा कि जब सात सितंबर को आपरेशन शुरू किया था हर जगह पानी था। तब काफी परेशानी हुई थी लेकिन अब हजारों लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
रविवार को श्रीनगर के कई क्षेत्रों में जलस्तर भी कम हुआ। कई क्षेत्रों में अब डायरिया और अन्य बीमारियां फैलने की आशंका हो गई है। इसे देखते हुए एनडीआरएफ ने जलभराव वाले क्षेत्राें में पांच चिकित्सा शिविर स्थापित किए हैं। इनमें अमर सिंह कालेज रोड, शेरगढ़ी, बख्शी स्टेडियम, नौगांव और कुशुपोर इलाके शामिल हैं।
राशन की सप्लाई दोगुनी करें: उमर
वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राशन की सप्लाई दोगुनी कर दें। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के साठ प्रतिशत क्षेत्रों में बिजली की सप्लाई बहाल हो गई है। अगले दो सप्ताह में पूरे क्षेत्र में सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।
दो मोर्चो पर युद्ध जीत रही सेना
जम्मू, [विवेक सिंह]। सीमावर्ती जम्मू-कश्मीर में सेना दो मोर्चो पर अपनी जीत दर्ज करवा रही है। प्रकृति के कहर से दो लाख लोगों को बचाकर सेना ने राहत अभियान का नया कीर्तिमान बनाया है तो दुश्मन के नापाक इरादे नाकाम बनाने के लिए बाढ़ से सीमा पर हुए नुकसान की भी भरपाई कर ली गई है।
सीमा पर दुश्मन को नाकाम बनाने की लड़ाई को उत्तरी व पश्चिमी कमान मिलकर लड़ रही हैं। कश्मीर में राहत अभियान के बीच सेना ने 4 आतंकियों को मार गिराया है। इनमें से तीन कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा से घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। ऐसे हालात में अखनूर से पुंछ तक नियंत्रण रेखा पर डिफेंस मजबूत बनाने के अभियान में पठानकोट से लेकर चंडीगढ़ तक से आई इंजीनियरिंग टीमें दल बल के साथ सहयोग दे रही हैं। चूंकि सोलह कोर से भी इंजीनियरिंग उपकरण कश्मीर भेजे गए हैं इसलिए पंजाब से बड़ी मशीनें लेकर कुछ नई टीमें भी आ रही हैं।
पिछले सात दिनों में जम्मू संभाग में सेना की इंजीनियर रेजीमेंटों ने तीन सौ किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा पर क्षतिग्रस्त फैंसिंग को लगभग ठीक कर दिया है। सिर्फ जलमग्न इलाकों में ही फेंसिंग को ठीक करना बाकी है। इसके साथ बाढ़ के कारण जिन चौकियों, बंकरों, सीमांत क्षेत्रों को जोड़ने वाले पुलों का नुकसान हुआ था, उन्हें भी काफी हद तक ठीक कर लिया गया है।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीमा की सुरक्षा को पुख्ता कर दिया गया है व दुश्मन चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता है। नियंत्रण रेखा पर जो भी संवेदनशील स्थान हैं वहां पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दुश्मन पर नजर रखी जा रही है।
इस बीच सीमांत क्षेत्रों में सेना की मूवमेंट को सुचारू रखने के लिए पिछले कुछ दिनों में सेना ने निक्की तवी के फलाएं मंडाल के साथ सीमावर्ती परगवाल के हमीरपुर कोना में भी पुल बनाकर सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित कर दी है। इससे जवानों के नियंत्रण रेखा तक जाने के साथ वहां बड़ी इंजीनियरिंग मशीनें भी पहुंच रही हैं। रक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण राजौरी-पुंछ जिलों को जोड़ने वाले दरूंगी नाला पुल के साथ टीडीआर नाले पर भी सेना ने बड़े पुल बना दिए हैं। कुछ सीमांत क्षेत्रों में पुल बनाने का कार्य पूरा होने वाला है।
वहीं, सड़क संपर्क बहाल करने के लिए भी इस समय भी समय सीमा सड़क संगठन की पांच टास्क फोर्स में शामिल 6 हजार इंजीनियर व अन्य कर्मी दिन रात जुटे हुए हैं।।
रविवार को श्रीनगर तथा जम्मू में मौसम खराब होने के कारण करीब तीन घंटे तक वायु सेना, सेना व राहत कार्य में जुटी अन्य एजेंसियां अपना अभियान नहीं चला पाई। इससे कई क्षेत्रों में राहत नहीं पहुंचाई जा सकी। बाढ़ में फंसे लोगों का इससे सुरक्षित स्थानों पर आने का इंतजार लगातार बढ़ता गया। वहीं, जब मौसम में सुधार हुआ तो वायु सेना को फिर से राहत पहुंचाने में परेशानी हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र ंिसह ने कहा कि बारिश इतनी तेज होने की संभावना नहीं है जैसी पहले हुई है।
श्रीनगर के रैनावाड़ी क्षेत्र में चार बार हेलीकाप्टरों पर कुछ शरारती तत्वों ने पत्थर फेंके। इससे इस जगह पर राहत सामग्री भी नहीं उतारी जा सकी। लोगों में इस क्षेत्र में भारी रोष देखने को मिला। इसे देखते हुए जम्मू से आर्म्ड पुलिस की दो बटालियनों को श्रीनगर में भेजा गया है ताकि कानून व्यवस्था को बनाया जा सके।
वहीं, एयर वाइस मार्शल उपकरजीत सिंह ने कहा कि जब सात सितंबर को आपरेशन शुरू किया था हर जगह पानी था। तब काफी परेशानी हुई थी लेकिन अब हजारों लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
रविवार को श्रीनगर के कई क्षेत्रों में जलस्तर भी कम हुआ। कई क्षेत्रों में अब डायरिया और अन्य बीमारियां फैलने की आशंका हो गई है। इसे देखते हुए एनडीआरएफ ने जलभराव वाले क्षेत्राें में पांच चिकित्सा शिविर स्थापित किए हैं। इनमें अमर सिंह कालेज रोड, शेरगढ़ी, बख्शी स्टेडियम, नौगांव और कुशुपोर इलाके शामिल हैं।
राशन की सप्लाई दोगुनी करें: उमर
वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राशन की सप्लाई दोगुनी कर दें। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के साठ प्रतिशत क्षेत्रों में बिजली की सप्लाई बहाल हो गई है। अगले दो सप्ताह में पूरे क्षेत्र में सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।
दो मोर्चो पर युद्ध जीत रही सेना
जम्मू, [विवेक सिंह]। सीमावर्ती जम्मू-कश्मीर में सेना दो मोर्चो पर अपनी जीत दर्ज करवा रही है। प्रकृति के कहर से दो लाख लोगों को बचाकर सेना ने राहत अभियान का नया कीर्तिमान बनाया है तो दुश्मन के नापाक इरादे नाकाम बनाने के लिए बाढ़ से सीमा पर हुए नुकसान की भी भरपाई कर ली गई है।
सीमा पर दुश्मन को नाकाम बनाने की लड़ाई को उत्तरी व पश्चिमी कमान मिलकर लड़ रही हैं। कश्मीर में राहत अभियान के बीच सेना ने 4 आतंकियों को मार गिराया है। इनमें से तीन कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा से घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। ऐसे हालात में अखनूर से पुंछ तक नियंत्रण रेखा पर डिफेंस मजबूत बनाने के अभियान में पठानकोट से लेकर चंडीगढ़ तक से आई इंजीनियरिंग टीमें दल बल के साथ सहयोग दे रही हैं। चूंकि सोलह कोर से भी इंजीनियरिंग उपकरण कश्मीर भेजे गए हैं इसलिए पंजाब से बड़ी मशीनें लेकर कुछ नई टीमें भी आ रही हैं।
पिछले सात दिनों में जम्मू संभाग में सेना की इंजीनियर रेजीमेंटों ने तीन सौ किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा पर क्षतिग्रस्त फैंसिंग को लगभग ठीक कर दिया है। सिर्फ जलमग्न इलाकों में ही फेंसिंग को ठीक करना बाकी है। इसके साथ बाढ़ के कारण जिन चौकियों, बंकरों, सीमांत क्षेत्रों को जोड़ने वाले पुलों का नुकसान हुआ था, उन्हें भी काफी हद तक ठीक कर लिया गया है।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीमा की सुरक्षा को पुख्ता कर दिया गया है व दुश्मन चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता है। नियंत्रण रेखा पर जो भी संवेदनशील स्थान हैं वहां पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दुश्मन पर नजर रखी जा रही है।
इस बीच सीमांत क्षेत्रों में सेना की मूवमेंट को सुचारू रखने के लिए पिछले कुछ दिनों में सेना ने निक्की तवी के फलाएं मंडाल के साथ सीमावर्ती परगवाल के हमीरपुर कोना में भी पुल बनाकर सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित कर दी है। इससे जवानों के नियंत्रण रेखा तक जाने के साथ वहां बड़ी इंजीनियरिंग मशीनें भी पहुंच रही हैं। रक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण राजौरी-पुंछ जिलों को जोड़ने वाले दरूंगी नाला पुल के साथ टीडीआर नाले पर भी सेना ने बड़े पुल बना दिए हैं। कुछ सीमांत क्षेत्रों में पुल बनाने का कार्य पूरा होने वाला है।
वहीं, सड़क संपर्क बहाल करने के लिए भी इस समय भी समय सीमा सड़क संगठन की पांच टास्क फोर्स में शामिल 6 हजार इंजीनियर व अन्य कर्मी दिन रात जुटे हुए हैं।।
Source: News in Hindi and Newspaper
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