Monday, 15 September 2014

SC directs advocate Prashant Bhushan to reveal source of information in Ranjit Sinha case

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआइ डायरेक्टर रंजीत सिन्हा के मामले में सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण को कहा है कि वह पहले उस व्यक्ति का नाम कोर्ट को बताएं जिसने उन्हें सिन्हा के खिलाफ यह सबूत सौंपे हैं। इसके बाद ही कोर्ट इस मामले में आगे सुनवाई करेगा।

सुबूत देने वाले व्यक्ति के नाम का खुलासा करने का विरोध करते हुए भूषण ने तर्क दिया था कि यह तब जरूरी है जब कोर्ट को सुबूतों पर संदेह हो या फिर उनके पास इसकी प्रमाणिकता को लेकर संदेह हो, या इसकी प्रमाणिकता जांचने का उनके पास कोई और विकल्प न हो। केवल ऐसी ही स्थिति में सुबूत देने वाले की पहचान को उजागर किया जा सकता है। लेकिन कोर्ट ने उनकी तमाम दलीलों को दरकिनार करते हुए उन्हें उस व्यक्ति की पहचान एक सील बंद लिफाफे में दर्ज कर कोर्ट में सौंपने को कहा है। अब इस मामले में सुनवाई अगली 22 सितंबर को होगी।

गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआइ डायरेक्टर के वकील ने कोर्ट से सबूत मुहैया करवाने वाले व्यक्ति की पहचान उजागर करने की मांग की थी। रंजीत सिन्हा के वकील का तर्क था कि प्रशांत भूषण उस व्यक्ति का नाम कोर्ट में उजागर करें जिसने आफिस की इंटरनल फाइल में की गई नोटिंग को उन्हें मुहैया करवाया है। इस दौरान उन्होंने गेस्ट रजिस्टर में हुई अधिकतर एंट्री को गलत बताया। वहीं दूसरी ओर प्रशांत भूषण का तर्क था कि कोर्ट को यदि उनके द्वारा कोर्ट को सौंपे गए रजिस्टर की एंट्री में शक है तो वह एक एसआईटी बनाकर इसकी जांच करवा ले। पांच मिनट में सब निकलकर आ जाएगा।

लेकिन कोर्ट ने उनकी सभी दलीलों को नकारते हुए साफतौर पर उस व्यक्ति की पहचान बताने के निर्देश दे दिए जिसने उन्हें यह सबूत मुहैया करवाए। वहीं रंजीत सिन्हा ने इस मामले में कहा कि उन्होंने टूजी और कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले के आरोपियों से मुलाकात की थी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं उन्होंने मामले को प्रभावित करने की कोशिश की है। 

No comments:

Post a Comment