कश्मीर में बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए जहां पर सेना, वायुसेना, स्थानीय लोग जी जान से जुटे हुए हैं, वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इंसानियत भूल चुके हैं। श्रीनगर व अन्य इलाकों में बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए मनमाने दाम वसूल रहे हैं। सब कुछ जानकर स्थानीय प्रशासन पंगु बना हुआ है। हालत यह है कि मात्र पांच किलोमीटर के लिए टैक्सी चालक तीन से चार हजार रुपये तो टैपों वाले एक हजार रुपये प्रति यात्री ले रहे हैं। यही हाल कुछ शिकारे वालों का भी है।
बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए शिकारे वाले भी मनमाने दाम वसूल रहे है। एमएलए हॉस्टल से डल गेट तक पहुंचाने के लिए पंद्रह सौ रुपये प्रति सवारी लिए जा रहे हैं। रामबाग में बाढ़ में फंसे लोगों को करीब एक किलोमीटर तक पहुंचाने के लिए हजार रुपये प्रति सवारी लिया गया।
डल गेट के नजदीक होटल में ठहरे 47 यात्रियों को निकालने के लिए एक शिकारे वाले ने 15 हजार रुपये लिए, जबकि सफर मात्र एक सौ मीटर का था। सरकारी मशीनरी पूरी तरह से ठप है। इसलिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (निट) में इंजीनियरिंग के लिए चयनित होने के बाद पहली बार कश्मीर पहुंचे आशीष कुमार का अनुभव जिंदगी में कभी न भूलने वाला है। निट के होस्टल में जब बाढ़ से पानी भरने लगा तो विद्यार्थियों को कश्मीर विवि पहुंचा दिया गया। कश्मीर विवि में अन्य विद्यार्थियों के साथ दो दिन भूखे प्यासे बिताने के बाद जब जल स्तर कम हुआ तो स्वयं ही हिम्मत करके विद्यार्थियों ने वहां से निकलने की कोशिश की। मात्र आठ किलोमीटर के नौ विद्यार्थियों से टैंपो वाले ने दस हजार रुपये लिए। आशीष ने कहा कि टैपों वाले ने हमें बीच में ही छोड़ दिया और वहां से आगे पानी में पैदल चलकर हम हवाई अड्डे पहुंचे। आशीष देर रात वापस जम्मू लौटा है।
बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए शिकारे वाले भी मनमाने दाम वसूल रहे है। एमएलए हॉस्टल से डल गेट तक पहुंचाने के लिए पंद्रह सौ रुपये प्रति सवारी लिए जा रहे हैं। रामबाग में बाढ़ में फंसे लोगों को करीब एक किलोमीटर तक पहुंचाने के लिए हजार रुपये प्रति सवारी लिया गया।
डल गेट के नजदीक होटल में ठहरे 47 यात्रियों को निकालने के लिए एक शिकारे वाले ने 15 हजार रुपये लिए, जबकि सफर मात्र एक सौ मीटर का था। सरकारी मशीनरी पूरी तरह से ठप है। इसलिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (निट) में इंजीनियरिंग के लिए चयनित होने के बाद पहली बार कश्मीर पहुंचे आशीष कुमार का अनुभव जिंदगी में कभी न भूलने वाला है। निट के होस्टल में जब बाढ़ से पानी भरने लगा तो विद्यार्थियों को कश्मीर विवि पहुंचा दिया गया। कश्मीर विवि में अन्य विद्यार्थियों के साथ दो दिन भूखे प्यासे बिताने के बाद जब जल स्तर कम हुआ तो स्वयं ही हिम्मत करके विद्यार्थियों ने वहां से निकलने की कोशिश की। मात्र आठ किलोमीटर के नौ विद्यार्थियों से टैंपो वाले ने दस हजार रुपये लिए। आशीष ने कहा कि टैपों वाले ने हमें बीच में ही छोड़ दिया और वहां से आगे पानी में पैदल चलकर हम हवाई अड्डे पहुंचे। आशीष देर रात वापस जम्मू लौटा है।
Source: News in Hindi and Newspaper
No comments:
Post a Comment